
योग ( जोडना) (उत्पत्ति : योज् (संकृत)) एक प्राचीन दर्शन तथा चिकित्सा पद्धति है जिसका विकास भारत में हुआ था । यह ध्यान, मनन तथा आसनों पर आधारित है ।
योग के निपुण अभ्यासी पुरुष को योगी कहा जाता है , स्त्री को योगिनी ।
आज योग एक विकसित आध्यात्म, दर्शन तथा चिकित्सा पद्धति है जो भारत से फैलकर कई देशों में पहुंच चुका है । चित वृतियों पर नियंत्रण और उस का विरोध ही दर्शन शास्त्र में योग शब्द से विभूषित हुआ है। जब ऎसा हो जाता है और ऎसा होने पर उस व्यक्ति को भूत और भविष्य आंकने मे किसी प्रकार की कोई परेशानी नही होती, वह अपने संकेत से ब्रह्माण्ड को चलायमान कर सकता है।
योग के प्रकारभारतीय योग शास्त्र मे इसके पांच भेद बताए गए हैं-
ज्ञान योग -- आत्मज्ञान,
हठ योग -- आसन एवं कुण्डलिनी जागृति
कर्म योग -- योग: कर्मसु कौशलम् (कर्मों में कुशलता लाना ही योग है।)
भक्ति योग -- भजनकुर्याम
राजयोग -- योगः चित्तवृत्ति निरोधः (चित्त की वृत्तियों पर नियंत्रण ही योग है।)
महर्षि पतंजलि ने योग का अर्थ चित की वृतियों का निरोध (योगः चित्त-वृत्ति निरोध:) बताया है। उनके अनुसार योग के आठ अंग हैं, जो कि निम्नलिखित हैं:
महर्षि पतंजलि ने योग का अर्थ चित की वृतियों का निरोध (योगः चित्त-वृत्ति निरोध:) बताया है। उनके अनुसार योग के आठ अंग हैं, जो कि निम्नलिखित हैं:
यम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह) बाहरी अंग
नियम (स्वाध्याय, सन्तोष, तप, पवित्रता, और ईश्वर के प्रति चिन्तन) बाहरी अंग
आसन बाहरी अंग
प्रणाय़ाम बाहरी अंग
प्रत्याहार बाहरी अंग
धारणा भीतरी/मानसी अंग
ध्यान भीतरी/मानसी अंग
समाधि भीतरी/मानसी अंग